Monday, 24 August 2015

जनता की आवाज़ : स्वास्थय से खिलवाड़ ! पढ़ेंगे सॉस बनाने का तरीका तो ...

जनता की आवाज़ : स्वास्थय से खिलवाड़ ! पढ़ेंगे सॉस बनाने का तरीका तो ...:        अगर आप और आपके बच्चे ठेले, खोमचे-दुकानों से भर-भर पेट फास्ट फूड आदि खाते हों तो जरा सावधान हो जाइए।  #और नीचे चित्र में देखिये कैसे ...

स्वास्थय से खिलवाड़ ! पढ़ेंगे सॉस बनाने का तरीका तो खाना छोड़ देंगे !

       अगर आप और आपके बच्चे ठेले, खोमचे-दुकानों से भर-भर पेट फास्ट फूड आदि खाते हों तो जरा सावधान हो जाइए।  #और नीचे चित्र में देखिये कैसे बन रहे है टोमेटो सॉस ,  बड़ी मात्रा में सड़े कद्दू, आलू और केमिकल से टोमैटो सॉस बनाया जा रहा है। इसमें टमाटर का नामो-निशान नहीं है । कानपुर में बर्रा पुलिस ने रविवार को जरौली गांव में मिलावटी खाद्य पदार्थों की दो फैक्ट्रियां पकड़ कर यह खुलासा किया है।। 
ऐसे बन रहा है टोमैटो सॉस

इंस्पेक्टर संतोष सिंह के मुताबिक आमरस फैक्ट्री का संचालक मौके से पकड़ा गया है, जबकि टोमैटो फैक्ट्री संचालक अतुल पाठक को बाद में दबोच लिया गया। खाद्य विभाग की टीम ने भी सैंपल भरे हैं।
             एक सूचना पर शाम को बर्रा इंस्पेक्टर ने फोर्स के साथ जरौली गांव स्थित सुरेंद्र के मकान पर छापा मारा तो वहां भारी मात्रा में आमरस की पैकिंग व कोकोनट पेडे़ के पैकेट बरामद किए। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक जरौली निवासी गोपाल सिंह को मौके से ही पकड़ लिया। 
      
         जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की पूर्व हेड डॉ. आरती लाल चंदानी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि सस्ता कैचअप-सॉस तैयार करने के लिए सड़ी सब्जियों को और ज्यादा सड़ाया जाता है। गाढ़ेपन के लिए उसमें सड़ा कद्दू, खराब लौकी, हानिकारक रंग, खट्टेपन के लिए केमिकल आदि डालते हैं। इसे खाने से डायरिया, उल्टियां, फूड प्वाइजनिंग, गेस्ट्रोइंट्राइटिस हो सकता है। स्किन एलर्जी, आंखों की एलर्जी, दमा से लेकर लिवर, किडनी फेल हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले केमिकल बहुत घातक होते हैं।
        फैक्ट्री में दो पैकिंग मशीनों के अलावा भारी मात्रा में कच्चा व तैयार माल बरामद किया गया है। गंदे फर्श पर मिलावटी आमरस सुखाने के लिए फैलाया गया था। चारों ओर इतनी गंदगी थी कि सांस लेना दूभर था। पुलिस ने खाद्य विभाग की टीम को भी बुला लिया। 

                                                                                           और कल पढ़िये बिना आम के आम रस 


Friday, 14 August 2015

जनता की आवाज़ : उत्साह या दुस्साहस !

जनता की आवाज़ : उत्साह या दुस्साहस !:       जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम को यहां रेलवे स्टेशन से लेकर टाउन हॉल तक  बस्‍ती में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के...

उत्साह या दुस्साहस !

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम को यहां रेलवे स्टेशन से लेकर टाउन हॉल तक बस्‍ती में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के समर्थन में नि‍काले गए एक जुलूस के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का मामला सामने आया है।आरोप है कि‍ जुलूस जब अस्पताल चौराहे के पास पहुंचा, तो कुछ कार्यकर्ता पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। 

                       बस्ती में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले (AIMIM) के समर्थक।



           इस मामले में गुरुवार को बीजेपी के जिलाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र और पूर्व अध्यक्ष यशकांत सिंह की अगुवाई में हिंदू संगठनों ने डीएम को एक ज्ञापन सौंपा है।दयाशंकर ने कहा कि यदि‍ प्रशासन इस मामले की जांच गंभीरता से नहीं कराता और दोषियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज नहीं होता, तो पार्टी अपने स्तर से निपटेगी। 

   वहीं, एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष शोएब अहमद आजमी ने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है। यदि‍ इस तरह की बात सामने आती है, तो ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

Saturday, 15 November 2014

सफाई के नाम पर लोग खिचवाते है फोटो !

       
         माननीय प्रधानमंत्री जी ने सफाई अभियान क्या चलाया लोगो को फोटो खिचवाने का एक सुन्हेरा मौका मिल गया , लोगो फोटो खीच कर सोशल मीडिया पर अपनी छवि सुधारने में लग गए है !
चकनाचूर कर दिया स्वच्छ भारत का सपना !
     
    माननीय प्रधानमंत्री जी ने सफाई अभियान शुरुआत करते समय शायद यह नहीं सोचा होगा की उनके इस अभियान को भारत के लोगो ( नेता, कर्मचारी और अधिकारी ) अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयोग करेंगे , नाकि उनके एजंडे को आगे बढ़ा कर भारत विश्व में एक पहचान दिलाएगें ! हमारा भारत के लोगो से निवेदन है कि केवल अपना घर साफ करे पूरा भारत सव्च्छ हो जायेगा ! अपनी जिम्मेदारी समझो पूरा भारत सुधर जायेगा ! 

Monday, 30 September 2013

गाँधी जयंती राष्ट्रीय पर्व नहीं !

   Delhi: 2 अक्टूबर को गांधी जयंती,15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे देश में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है! राष्ट्रीय पर्व के रूप में ही इन तिथियों पर अवकाश भी रहता है, लेकिन सरकारी दस्तावेज में इनका कोई उल्लेख नहीं है!
    लखनऊ के एक स्कूल में सातवीं की छात्रा ऐश्वर्या पराशर ने  (आरटीआइ) से इन तिथियों को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने संबंधी जानकारी मांगी थी! जिसके बाद केंद्र सरकार ने 13 सितंबर को  ऐश्वर्या को जानकारी भेजी जिसके मुताबिक, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने संबंधी कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है.
इस जवाब से निराश लोग अब यह कह रहे है कि - अब तक किताबों में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती को राष्ट्रीय पर्व के रूप में पढ़ रहे थे! लेकिन इनके बारे में किसी आदेश का न होना आश्चर्य पैदा करता है.' इससे पहले ऐश्वर्या ने केंद्र सरकार से महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित करने संबंधी किसी आदेश की जानकारी मांगी थी.


ऐश्वर्या के सवाल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान के अनुच्छेद 18-1- का हवाला देकर महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित करने से इंकार करते हुए आरटीआई की अर्जी को राष्ट्रीय अभिलेखागार भेज दिया था. इसके बाद ऐश्वर्या ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की. केंद्रीय सूचना आयुक्त बसंत सेठ के 7 अगस्त के आदेश में कहा गया कि केंद्र के पास गांधी जी को राष्ट्रपिता घोषित करने का कोई अभिलेख नहीं है!
                       

Wednesday, 25 September 2013

E- बाज़ार का बढ़ता क्रेज

   
आज कल के युवाओ में ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदने का एक चलन सा हो गया है ! चाहे उन्हें कोई स्मार्ट फ़ोन खरीदना हो,या प्रतिदिन के उपयोग के लिए कपडे ! इस सब के लिए दौडती भागती जिंदगी में शायद आज के युवा के लिए टाइम नहीं है !
 तभी तो वह लैपटॉप या कंप्यूटर के की-बोर्ड पर ऊँगली घुमाते हुए अपने ज़रुरत के सामान को वेबसाइट के माध्यम से ढूढना शुरू कर देता है और प्रोडक्ट के मिलते ही वह मन पसंद चीजों को आर्डर कर देता है !
                                                                                       

                                                                                      इसके लिए ऑनलाइन बाज़ार में एक संघर्ष का दौर सा चल पड़ा है , कंपनी एक से बढ़ कर एक डील दे रही है !

केंद्र सरकार का केंद्रीय कर्मचारियों को चुनावी तोहफा !


  केंद्र सरकार ने देश के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 30 लाख पेंशनर्स को एक और बड़ा तोहफा दिया है, अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महगाई भत्ते में बढ़ोतरी किया था, महज कुछ दिन बाद ही यूपीए सरकार ने सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी। यह वेतन आयोग अगले 2 साल में अपनी सिफारिशें पेश करेगा। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को प्रधानमंत्री द्वारा नए वित्‍त आयोग के गठन को मंजूरी दिए जाने की जानकारी देते हुए यह भी बताया कि इस आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू होंगी।वेतन आयोग के चेयरमैन और सदस्यों के नामों की घोषणा जल्द की जाएगी।
   जानकार इसे चुनावी तोहफा मान रहे हैं क्योंकि इस बार चुनाव को देखते हुए सरकार ने वक्त से पहले ही वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी है। जानकारों का यह मानना है कि इस बार सरकार तय वक्त से वेतन आयोग की सिफारिशों को भी लागू कर देगी। इससे पहले छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकार ने 1 जनवरी 2006 से लागू किया था।

Friday, 13 September 2013

दिल्ली गैंगरेप के चारों दोषियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट।

   दिल्ली के वसंत विहार गैंगरप केस में फैसला. ज्योति सिंह पांडेय के हत्यारों का फांसी की सजा. मुकेश, विनय, पवन और अक्षय ठाकुर को फांसी. साकेत कोर्ट ने सुनाई सजा.
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद चारों दोषी कोर्ट में चीख-चीख कर रोए !


बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे.
By-AAJ TAK



http://aajtak.intoday.in/story/delhi-gang-rape-capital-punishment-for-all-four-convicts-1-741617.html

2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला गुनहगारों को सजा ए मौत !

दिल्ली में 16 दिसंबर की रात जो दरिंदगी दिखाई गई , अदालत ने आज उस पर अपना फैसला सुनाकर इंसाफ दे दिया। दामिनी के चार दरिंदों को सजा-ए-मौत सुनाई गई है।मंगलवार को सभी दोषियों को 11 धाराओं के तहत दोषी पाया गया था। और बुधवार को जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रखा था।

करीब दस महीने पहले दिल्ली की एक सर्द रात में छह दरिंदों ने बेसहारा युवती के साथ जो किया, उसके सामने हैवानियत, दरिंदगी, वहशियाना जैसे लफ्ज भी बौने पड़ गए। लेकिन 11 सितंबर के ऐतिहासिक दिन दामिनी को आखिरकार न्याय मिला।बुधवार को हुई बहस के दौरान सरकारी वकील ने चारों दोषियों के लिए सजा-ए-मौत की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के वकील ने दलील देते हुए कहा था कि उन्हें सुधरने के लिए एक मौका दिया जाना चाहिए।इस घटना की वजह से देश भर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराध जैसी गंभीर समस्या को उठाया गया।





सरकार भी बलात्कार के मामलों में ज्यादा सख्त कानून लाने पर मजबूर हुई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने खचाखच भरी अदालत में मंगलवार को कहा था कि अभियोजन पक्ष ने जो गवाह और सबूत सामने रखे, उसके बाद इस बात में कोई संदेह नहीं बचा कि मुकेश, विनय कुमार, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता 16 दिसंबर को बस में 23 वर्षीय युवती से ज्यादती की और उस पर हमला किया।अदालत का कहना था कि पीड़िता के बयान, अभियोजन पक्ष की ओर से पेश 85 गवाह, डीएनए, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से यह साफ होता है कि आरोपी, दोषी हैं।

अभियोजन पक्ष ने सभी दोषियों के लिए सजा-ए-मौत की मांगी, क्योंकि उनके हिसाब से यह अपराध 'रेयरस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में आता है।